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गरीब किसान का बेटा जिसने किस्मत को बदल डाला, जानें कैसे एक तेल बेचने वाला बन गया कैबिनेट मंत्री

जिंदगी में अगर कोई चीज सचमुच मायने रखती है तो वह है मेहनत। बाकी सब साथ चलता है। कभी-कभी किस्मत भी मुस्कुरा देती है। बिहार की नई नीतीश कैबिनेट में शामिल हुए डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी की कहानी ठीक वैसी ही है। एक गरीब किसान का बेटा जो सुबह चार बजे अखबार बेचता था और शाम को तेल बेचकर घर लौटता था। आज वही शख्स बिहार सरकार में सहकारिता और पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का मंत्री है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए संदेश है जो गांव की मिट्टी में अभी भी सपने बो रहे हैं।

गांव का नाम नरथुआ मठ, सपने बहुत बड़े

जहानाबाद जिले के काको ब्लॉक में एक छोटा सा गांव है नरथुआ मठ। पटना-गया हाईवे से महज तीन किलोमीटर अंदर। रेलवे लाइन काटकर जाना पड़ता है इसलिए गाड़ी लेकर कोई नहीं जाता। दो साल पहले तक यहां मंत्री जी का घर भी झोपड़ी ही था। आज पक्का मकान है लेकिन गांव में अभी भी न स्कूल है न अस्पताल।

प्रमोद चंद्रवंशी पांच भाइयों-बहनों में सबसे बड़े हैं। पिता अयोध्या प्रसाद और मां राजकुमारी देवी खेती करते थे। खेत बहुत छोटा था। घर चलाने के लिए प्रमोद पटना के पोस्टल पार्क में रहने लगे। सुबह अखबार बांटते। जब पढ़ाई का खर्च बढ़ा तो शाम को तेल बेचने लगे। आज भी पोस्टल पार्क में उनकी पुरानी दुकान है।

पढ़ाई कभी नहीं छूटी, पीएचडी तक पहुंचे

किसी तरह मेहनत करके इंटर पास किया। फिर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन। आखिर में पीएचडी भी पूरी की। लोग अब उन्हें डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी कहते हैं। यह डॉक्टर की उपाधि किसी बड़े कॉलेज की नहीं बल्कि जिंदगी की कड़वी यूनिवर्सिटी की है।

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राजनीति में कदम 1986 में, पीछे मुड़कर नहीं देखा

1986 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीतिक सफर शुरू हुआ। पटना से बोधगया तक पदयात्रा की। छात्रों की मांगों के लिए सड़कों पर उतरे। भाजपा ने भरोसा जताया और विधान पार्षद बनाया। उस वक्त भी कई लोगों को हैरानी हुई थी कि एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति इतनी जल्दी ऊपर कैसे पहुंच गया।

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लेकिन प्रमोद चंद्रवंशी ने चमक-दमक से दूरी बनाए रखी। न कोई बड़ा बंगला न लग्जरी गाड़ी। गांव आते-जाते रहे। लोगों से मिलते रहे। यही सादगी काम आई। इस बार एनडीए सरकार में भाजपा कोटे से उन्हें दो महत्वपूर्ण विभाग मिले। सहकारिता और पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन।

गांव वालों की उम्मीदें अब आसमान छू रही हैं

2021 में जब वे एमएलसी बने थे तो गांव में पहली पक्की सड़क बनी। अब मंत्री बन गए हैं तो लोग कह रहे हैं कि शायद अब स्कूल बनेगा। अस्पताल खुलेगा। बिजली की लाइन दुरुस्त होगी। बच्चे अब रेलवे ट्रैक पार करके नहीं जाएंगे स्कूल।

एक बुजुर्ग ने बताया कि प्रमोद भैया जब मंत्री बनने की खबर आई तो पूरा गांव रो दिया था। खुशी के मारे। कोई सोच भी नहीं सकता था कि हमारा लड़का इतना ऊपर पहुंच जाएगा।

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डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी की कहानी यह बताती है कि सफलता कोई जादू नहीं है। यह सुबह चार बजे उठने में छुपी है। अखबार बेचने में छुपी है। तेल की दुकान चलाने में छुपी है। और सबसे ज्यादा उस जिद में छुपी है जो कभी हार नहीं मानती।

बिहार को ऐसे और नेताओं की जरूरत है जो जमीन से जुड़े हों। जो यह समझते हों कि गांव की झोपड़ी में रहने वाला बच्चा भी सपने देख सकता है। और उन्हें पूरा भी कर सकता है।

मंत्री जी अब कुर्सी पर हैं। उम्मीद है कि वे उस कुर्सी को गांव की उस झोपड़ी तक ले आएंगे जहां से उनका सफर शुरू हुआ था।

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