प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला नेता को अखिलेश ने लगाई ‘फटकार’, बोले- टिकट मांगने आई हो, नहीं मिलेगा
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव में टिकट लेना आसान नहीं होगा। लखनऊ या दिल्ली के चक्कर लगाने से अब कुछ नहीं होगा। टिकट उसी कार्यकर्ता को मिलेगा जिसका बूथ स्तर पर दमदार प्रदर्शन होगा और जो पार्टी की PDA रणनीति को जमीन पर उतारेगा।
महिला नेता के साथ हुआ तीखा संवाद
लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पड़ोसी जिले की एक महिला नेता मौजूद थीं। पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव कुछ कह रहे थे कि पीछे से महिला नेता ने कोई टिप्पणी की। बस फिर क्या था, अखिलेश यादव ने तुरंत तल्ख लहजे में कहा कि टिकट मांगने आई हो, वहीं तुम्हारी विधानसभा सीट तो लखनऊ के बगल में है। वहाँ जमीनी स्तर काम कराओगी तभी बात बनेगी। सिर्फ लखनऊ में डेरा डालने से टिकट नहीं मिलेगा।
गुटबाजी ने दो चुनाव डुबोए
2017 और 2022 में समाजवादी पार्टी को जो करारी हार मिली उसके पीछे सबसे बड़ा कारण एक ही सीट पर कई दावेदारों का आपस में खींचतान करना रहा। जिसे टिकट नहीं मिलता वह चुपके से जीते हुए प्रत्याशी को हराने में जुट जाता है। अगले चुनाव में अपना दावा मजबूत करने की फिराक में पार्टी की जीती बाजी भी हार जाती है। अखिलेश यादव इस बीमारी को अच्छी तरह समझते हैं।
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लखनऊ की परिक्रमा बंद, बूथ पर हाजिरी लगाओ
इस बार अखिलेश यादव का मूड बिल्कुल साफ है। बड़े नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाने वाले, रिश्तेदारी का वास्ता देने वाले और सिर्फ पार्टी दफ्तर के चक्कर काटने वाले लोग टिकट की उम्मीद छोड़ दें। अब टिकट का पैमाना सिर्फ तीन चीजें होंगी – बूथ मजबूती, PDA सम्मेलनों में सक्रियता और कार्यकर्ता के तौर पर दिन-रात मेहनत।
कार्यकर्ताओं में नया जोश
जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए ये बयान किसी संजीवनी से कम नहीं है। सालों से लखनऊ-दिल्ली की दौड़ में पिछड़ने वाले सच्चे सिपाही अब समझ रहे हैं कि 2027 में उनकी मेहनत ही रंग लाएगी। दूसरी तरफ चमचागीरी करने वाले नेताओं में खलबली मच गई है।
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संदेश साफ है; परफॉर्म या घर बैठो
अखिलेश यादव ने जिस तरह खुलेआम एक नेता की क्लास लगाई उससे साफ हो गया कि इस बार टिकट बंटवारे में कोई रियायत नहीं होगी। चाहे कोई कितना भी बड़ा रसूख वाला क्यों न हो, बिना ग्राउंड वर्क के टिकट मिलना नामुमकिन है। समाजवादी पार्टी अब गुटबाजी की पुरानी बीमारी से बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रही है। देखना यह है कि 2027 तक यह नई रणनीति कितना रंग दिखाती है।


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