भारत का सस्ता चावल बना अमेरिका का सिरदर्द, ट्रंप ने बदला ट्रेड गेम
India Basmati Rice US Tariffs: इन दिनों भारत और रूस के बीच के गहरे और मजबूत होते संबंधों की चर्चा सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रही है। यह करीबी दोनों देशों के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ रही है। मगर इस बढ़ती दोस्ती के माहौल में एक और खबर है जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी को दर्शाती है। हाल ही में उन्होंने एक बार फिर भारत पर नया शुल्क यानि ‘टैरिफ’ लगाने की बात कही है, जिसने व्यापार जगत में हलचल मचा दी है।
चावल के आयात पर अतिरिक्त शुल्क की तैयारी (Trump Tariff On Indian Rice)
सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह भारत से आयात होने वाले चावल पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बारे में विचार कर रहे हैं। उनका सीधा आरोप है कि भारत अमेरिका में सस्ते चावल की ‘डंपिंग’ कर रहा है, जिससे अमेरिकी चावल उत्पादकों का भारी नुकसान हो रहा है।
व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों को अरबों डॉलर की सहायता का ऐलान करते समय ट्रंप ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत से आ रहे सस्ते चावल के कारण अमेरिकी किसानों को उनके उत्पाद के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। उन्हें यह जानकारी कैनडी राय मिल्स नाम की एक प्रमुख अमेरिकी चावल कंपनी की सीईओ और मालकिन मैरिल कैनेडी ने दी है। इसके बाद ट्रंप ने भारतीय चावल पर और सख्त टैरिफ लगाने की अपनी योजना साफ कर दी ताकि अमेरिकी किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।
डंपिंग करने वाले देशों की सूची
डोनाल्ड ट्रंप को एक सूची सौंपी गई है, जिसमें भारत के साथ-साथ थाईलैंड और चीन जैसे कई देशों पर अमेरिका के बाज़ार में सस्ते चावल की डंपिंग का आरोप लगाया गया है। इस सूची को देखकर ट्रंप ने अपनी नाराज़गी व्यक्त की और अपने वित्त मंत्री स्कॉट वेंस से भारत के बारे में जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि भारत ऐसा क्यों कर रहा है और क्या चावल पर कोई शुल्क छूट है?
ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा कि अमेरिकी किसानों को बचाने के लिए भारतीय चावल पर ( india us basmati rice dispute) कड़ा टैरिफ लगाया जा सकता है।
वित्त मंत्री को ट्रंप ने बीच में ही टोका
जवाब में वित्त मंत्री स्कॉट वेंस ने कहा कि “सर हम अभी भारत के साथ एक व्यापार समझौते (ट्रेड डील) पर काम कर रहे हैं”। मगर ट्रंप ने तुरंत उन्हें टोकते हुए कहा कि “तो फिर वे डंपिंग नहीं कर सकते। मैंने और लोगों से भी सुना है। अब ऐसा नहीं चलेगा।”
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ट्रंप ने साफ़ किया कि वह भारतीय चावल की इस कथित डंपिंग के मामले को खुद देखेंगे, जिसका अर्थ है कि भारत से आने वाले चावल पर अब और ज्यादा शुल्क लग सकता है। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि वह कनाडा से आने वाले खाद पर भी टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं ताकि अमेरिका में चावल का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
व्यापार समझौते की उम्मीदों पर फिर पड़ा असर
एक तरफ जहाँ अमेरिका और भारत के बीच एक बड़े व्यापार समझौते की उम्मीद थीछ वहीं ट्रंप के इस बयान ने फिर से तनाव पैदा कर दिया है। इससे पहले भी, अगस्त महीने में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत से आने वाली कई वस्तुओं पर 50% तक टैक्स लगा दिया था। उनका तर्क था कि भारत ने व्यापार में बाधाएं खड़ी की हैं और रूस से तेल खरीदा है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हफ्ते अमेरिका की एक टीम भारत आने वाली है और इस दौरे से किसी बड़े समझौते की उम्मीद जताई जा रही है।
किसान हित या कूटनीतिक दबाव
ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि यह शुल्क वह अमेरिकी किसानों की सुरक्षा के लिए लगा रहे हैं। मगर इसका सीधा असर भारत और कनाडा जैसे देशों के निर्यात पर पड़ सकता है। ट्रंप ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि उनकी सरकार इन आरोपों की जांच कर रही है और ज़रूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के बाद जब भारत और रूस के संबंध और मजबूत हुए हैं तभी ट्रंप का यह ‘एक्शन’ लेने की तैयारी व्यापार नीति के अलावा कूटनीतिक दबाव की ओर भी इशारा करती है। ट्रंप की इस नीति पर अमेरिका के कई विशेषज्ञ पहले भी आलोचना कर चुके हैं, मगर उन पर इसका कोई खास असर नज़र नहीं आता। अब देखना यह है कि भारतीय चावल पर प्रस्तावित यह नया शुल्क दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।


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