उत्तर प्रदेश

बेटों की गलती पर मां को उठा ले गई पुलिस, पूरा मामला जानकर हैरान रह जाएंगे आप

UP Crime News: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानूनी गलियारों और आम जनता के बीच हलचल पैदा कर दी है। अक्सर कहा जाता है कि बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मां-बाप की होती है। मगर क्या बच्चों के किए अपराध की सजा सीधे तौर पर उनकी मां को दी जा सकती है? बदायूं पुलिस ने कुछ ऐसा ही किया है जिसे अब ‘मोरल पुलिसिंग’ का नाम दिया जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद

घटना उसहत थाना क्षेत्र की है। यहां आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ चार नाबालिग लड़कों ने छेड़छाड़ की। जब छात्रा ने हिम्मत दिखाकर विरोध किया तो उन लड़कों ने उसके साथ मारपीट की और मौके से फरार हो गए। पीड़ित बच्ची ने घर जाकर आपबीती सुनाई जिसके बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामला संवेदनशील था क्योंकि आरोपी दूसरे समुदाय के थे और उन पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

हैरानी की बात तब हुई जब पुलिस ने मुख्य आरोपियों यानी उन नाबालिग लड़कों को पकड़ने के बजाय उनकी माताओं को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार महिलाओं में रेशमा, जमरूद जहां, सबाना बेगम और नाहिरा बेगम शामिल हैं। पुलिस का तर्क है कि मांओं ने अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं दिए इसलिए वे इस सजा की हकदार हैं।

कहां चूकी पुलिस

कानून के जानकार बताते हैं कि भारतीय दंड संहिता या पॉक्सो एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो बच्चों के अपराध के लिए माता-पिता को सीधे तौर पर सलाखों के पीछे डाल दे। अभिभावकों को केवल तभी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जब उन्होंने अपराध में साथ दिया हो या सबूत मिटाने में मदद की हो।

इस मामले में पुलिस का यह कदम ‘नजीर पेश करने’ के नाम पर की गई एक भावनात्मक कार्रवाई नजर आती है। पुलिस का कहना है कि वे समाज को संदेश देना चाहते थे कि माता-पिता अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। हालांकि जानकारों का मानना है कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है न कि नैतिकता का पाठ पढ़ाना।

सोशल मीडिया और जनता के बीच तीखी प्रतिक्रिया

जैसे ही इन महिलाओं की गिरफ्तारी की खबर और उनकी तस्वीरें सामने आईं पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। लोगों का कहना है कि अगर लड़के घर से बाहर सड़क पर आवारागर्दी कर रहे हैं तो घर के अंदर काम कर रही मां को उसका दोषी कैसे माना जा सकता है? कई लोग इसे पुलिस की अपनी नाकामी छुपाने का तरीका भी बता रहे हैं क्योंकि मुख्य आरोपी लड़के अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

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पुलिस की इस भारी किरकिरी के बाद खबर है कि आला अफसरों ने स्थानीय थाने से जवाब तलब किया है। फिलहाल उन चारों महिलाओं को निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई है मगर इस घटना ने यूपी पुलिस की छवि पर एक नया सवालिया निशान लगा दिया है।

क्या ये सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने यह कदम शायद इसलिए उठाया ताकि फरार लड़कों पर दबाव बनाया जा सके और वे आत्मसमर्पण कर दें। पुलिस का कहना है कि इन लड़कों के पिता बाहर रहते हैं और उनके आने पर उन्हें भी हिरासत में लिया जाएगा। मगर सवाल वही बना हुआ है कि क्या किसी को डराने के लिए कानून की सीमाओं को लांघना सही है?

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