क्यों प्रतीक ने पत्नी अपर्णा यादव को कहा मतलबी, जानिए अंदर की बात
Aparna prateek divorce: ‘मैं इस मतलबी औरत को जल्द से जल्द तलाक देने जा रहा हूं। मैंने इतनी बुरी औरत कभी नहीं देखी। मैं बदकिस्मत था कि मेरी शादी उससे हुई।’ सपा मुखिया अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव के इंस्टाग्राम अकाउंट से जारी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर एकाएक वायरल हो गई। यह पोस्ट सियासी जगत में भी चर्चाओं का विषय बन गई है।
उप्र राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं अपर्णा
पोस्ट से क्लीयर है कि प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की पर्सनल लाइफ में भूचाल आ चुका है। भाजपा नेता अपर्णा यादव वर्तमान में उप्र राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। वह लंबे समय से भाजपा से जुड़ी हैं। यह दंपति चौदह साल पहले वैवाहिक बंधन में बंधा था। दोनों की दो बेटियां हैं। पोस्ट में प्रतीक यादव ने आरोप मढ़ा है कि अपर्णा ने मेरे परिवार के रिश्ते खराब कर दिए। वह बस मशहूर और असरदार बनना चाहती है। अभी मेरा मानसिक स्वास्थ्य काफी खराब है और उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उसे सिर्फ अपनी ही चिंता है। निश्चित रूप से प्रतीक और अपर्णा के रिश्ते बेहद खराब हो चुके हैं, तभी उन्होंने इस कड़वी सच्चाई को जगजाहिर करने का निर्णय लिया है।
आमतौर पर पति-पत्नी को गाड़ी के दो पहिए माना जाता है। गाड़ी चलाने के लिए दोनों पहियों का दुरुस्त होना जरूरी होता है। यदि एक भी पहिया गड़बड़ है तो गाड़ी नहीं चल पाती है। देश की सियासत में दो यादव परिवारों की चर्चाएं अक्सर होती रहती हैं। यूपी में मुलायम सिंह यादव और बिहार में लालू प्रसाद यादव। दोनों परिवारों में एक बात कॉमन देखने को मिलती है। वह यह कि मुलायम सिंह यादव के बाद सपा की गाड़ी सरपट दौड़ाने में उनके बेटे अखिलेश यादव ज्यादा सफल नहीं हो पाए हैं। यही हाल राजद का है।
फिलहाल पार्टी की कमान तेजस्वी के पास
लालू यादव अस्वस्थ होने और कानूनी पचड़ों में फंसने के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हैं। राजद की कमान उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने संभाल रखी हैं, मगर वह भी पार्टी को संभाल नहीं पा रहे हैं। बिहार की सियासत में राजद से अधिक चर्चा यादव परिवार के आपसी मतभेदों की होती रही है। लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव और एक बेटी ने खुद को इस परिवार से दूर कर रखा है।
इस कुनबे की लड़ाई जब-तब सोशल मीडिया के जरिए सामने आती रही है। इसी प्रकार अब अखिलेश परिवार की आंतरिक कलह भी जगजाहिर हो रही है। प्रतीक यादव की पोस्ट ने यूपी की सियासत में चर्चाओं की नई शुरुआत कर दी है। अपर्णा यादव की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रतीक के आरोपों पर भरोसा करें तो यह स्पष्ट है कि एक पत्नी के तौर पर अपर्णा अपनी जिम्मेदारी को बखूबी तरीके से निभाने में असफल रही हैं। राजनीति के साथ-साथ उन्हें अपने परिवार पर भी ध्यान देना चाहिए था।
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देश के सियासी घरानों में आपसी फूट कोई नई बात नहीं है। पूर्व में भी कई चर्चित मामले सामने आते रहे हैं। होना यह चाहिए कि इन घरेलू मामलों को सार्वजनिक करने से परहेज किया जाए। पारिवारिक विवाद को घर की चारदीवारी के भीतर बैठकर सुलझा लेना ही समझदारी है। उम्मीद है कि प्रतीक और अपर्णा का आपसी विवाद भी शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ जाएगा। दरअसल दंपति के मनमुटाव का प्रतिकूल असर बच्चों के करियर पर पड़ता है।

