जानें भारत को 4 दिनों में कैसे हो गया दो हजार करोड़ रुपए का नुकसान
Iran Israel War Impact 2026: मिडिल ईस्ट में ईरान, इज़राइल और US के बीच बढ़ते टकराव का सीधा असर भारतीय इकॉनमी पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के दोहरे संकट ने पिछले चार दिनों में भारत पर करीब दो हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त फाइनेंशियल बोझ डाला है। यह जंग आने वाले दिनों में इंपोर्ट पर निर्भर भारत के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
कच्चे तेल से 4 दिनों में 1,820 करोड़ रुपये का नुकसान
भारत अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हर दिन करीब 50 लाख (5 करोड़) बैरल कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। जंग की आशंका से तेल की कीमत औसतन $10 प्रति बैरल बढ़ गई है।
रुपये की गिरावट का ‘दोहरा’ झटका
तेल न सिर्फ महंगा हुआ है, बल्कि रुपया भी कमजोर हुआ है। भारत का सालाना तेल इंपोर्ट बिल करीब 160 बिलियन डॉलर है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया 1 रुपये कमजोर होता है, तो भारत पर सालाना 16 हजार करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा बोझ पड़ता है। अगर 4 दिन के हिसाब से देखें, तो रुपये के डेप्रिसिएशन की वजह से चार दिनों में रुपये को करीब 175 से 180 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, यानी हर दिन 44 करोड़ रुपये का नुकसान।
सप्लाई चेन खतरे में
JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर शिवाजी सरकार के मुताबिक, ईरान और US के बीच टकराव भारत जैसे इंपोर्ट-इंटेंसिव देशों के लिए खतरे की घंटी है। समुद्री और हवाई रास्तों पर अनिश्चितता ने कार्गो जहाजों की आवाजाही में रुकावट डाली है। इससे न सिर्फ इंपोर्ट बल्कि भारत के एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ सकता है।
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भारत के सामने बड़ी चुनौतियां
- महंगाई: डर है कि फ्यूल की बढ़ती कीमतों की वजह से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।
- फिस्कल मैनेजमेंट: बढ़े हुए इंपोर्ट बिल की वजह से सरकार को फिस्कल डेफिसिट को मैनेज करने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
- दूसरा रास्ता: अगर झगड़ा लंबा खिंचता है, तो भारत को तुरंत दूसरे सप्लाई सोर्स और ‘स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व’ का इस्तेमाल करना होगा।

