20 साल में 25 तबादले, फिर भी बेखौफ! इस IAS के डर से होने लगे रेस्टोरेंट, मिलावटखोरों में हड़कंप
काम के प्रति सच्ची निष्ठा, लगन, मेहनत और ईमानदारी जैसे गुण हर इंसान में नहीं होते। जिनमें यह गुण होते हैं, वे भीड़ का हिस्सा न बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। ऐसे निडर अधिकारियों को न तो किसी ताकतवर व्यक्ति का डर होता है और न ही वे किसी राजनीतिक दबाव के आगे झुकते हैं। महाराष्ट्र के चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे (IAS Tukaram Mundhe) भी ऐसे ही बिरले अफसरों में शुमार हैं, जिनके लिए अपना फर्ज सबसे ऊपर है।
वर्तमान में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर का पद संभाल रहे तुकाराम मुंढे की कार्यशैली की चर्चा इन दिनों महाराष्ट्र के सियासी, प्रशासनिक और कारोबारी गलियारों में जोरों पर है। मिलावटखोरी के खिलाफ उनके चलाए जा रहे ताबड़तोड़ अभियानों ने साबित कर दिया है कि अगर मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी काम असंभव नहीं है।
20 साल में 25 तबादले: ईमानदारी की कीमत, फिर भी तेवर बरकरार
आईएएस तुकाराम मुंढे का 20 साल के करियर में अब तक 25 बार तबादला हो चुका है। यह आंकड़ा ही उनकी कड़क और बिना समझौते वाली कार्यशैली की गवाही देता है। एफडीए (FDA) आयुक्त की जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने राज्य में मिलावटी सामान के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का खौफ इस कदर है कि सैकड़ों अवैध मिलावटखोरी की यूनिट्स सील कर दी गई हैं। हजारों लीटर जहरीला व मिलावटी दूध नालियों में बहा दिया गया। मिलावटखोरी के आरोप में 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुंबई और अमरावती जैसे बड़े शहरों में कार्रवाई के डर से रेस्टोरेंट, जूस सेंटर और बेकरी संचालक खुद अपनी दुकानों पर ताले लटकाकर भाग रहे हैं।
मुंबई के प्रभावशाली कारोबारियों में खौफ, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने जताई आपत्ति
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में होटल या रेस्टोरेंट चलाना बेहद खर्चीला और राजनीतिक प्रभाव का खेल माना जाता है। लेकिन तुकाराम मुंढे की निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई से कई प्रभावशाली व्यक्तियों को भी अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़े हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि इस ईमानदार अफसर से पंगा लेना भारी पड़ सकता है।
इसी बीच, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम की बेचैनी भी खुलकर सामने आई है। निरुपम ने मुंढे की कार्रवाई का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि वे दूध में मिलावट रोकने के मूल उद्देश्य का समर्थन करते हैं, लेकिन जिस तरीके से यह धरपकड़ चल रही है, उससे मुंबई में दूध का भारी संकट पैदा हो सकता है।
बॉलीवुड से मिला समर्थन: अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने की जमकर तारीफ
राजनीतिक गलियारों में विरोध के विपरीत आम जनता और सोशल मीडिया पर तुकाराम मुंढे को जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है। साउथ और बॉलीवुड की नामचीन अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने आईएएस तुकाराम मुंढे के इस साहसिक कदम और ईमानदारी की खुलकर तारीफ की है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें देश का असली ‘सिंघम’ बता रहे हैं।
मिलावटखोरी का मकड़जाल और देश को ‘मुंढे’ जैसे अफसरों की जरूरत
हमारे देश में तीज-त्योहारों से लेकर आम दिनों तक दूध, दही, घी, मक्खन, मावा और पनीर जैसी जीवनरक्षक चीजों में धड़ल्ले से मिलावट की जाती है। हालांकि मिलावटखोरी रोकने के लिए सख्त कानून हैं, लेकिन लचर तंत्र और भ्रष्टाचार के कारण मिलावटखोरों के मन में कानून का डर खत्म हो चुका है।
भेष बदलकर निकले मंत्री, कंडक्टर ने बस से उतारा और ऑटो वाले ने वसूला ज्यादा किराया; अब एक्शन में सरकार
खानपान की गुणवत्ता जांचने के लिए न तो पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है और जो सिस्टम है, वह उतना गंभीर नजर नहीं आता। ऐसे समय में जब मिलावटी खाना जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर बीमारियां पैदा कर रहा है, तब देश को तुकाराम मुंढे जैसे और अधिक निडर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की सख्त जरूरत है।

