राजीव गांधी के हत्यारे को दी श्रद्धांजलि? राहुल गांधी के पक्के दोस्त ने तमिलनाडु में कर दिया बड़ा कांड
राहुल गांधी और जोसेफ विजय की दोस्ती पर अब सवाल उठ रहे हैं। यह दोनों दिग्गज वर्तमान में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। राहुल जहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, वहीं विजय तमिलनाडु में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राहुल को कांग्रेस का युवराज माना जाता है तो विजय राजनीति में आने से पहले लोकप्रिय अभिनेता रहे हैं। दोनों का अलग-अलग रुतबा है। तमिलनाडु में फिलहाल टीवीके की सरकार है। इसके सुप्रीमो विजय जोसेफ हैं। अभिनय जगत में लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचने के बाद विजय ने टीवीके नामक राजनीतिक पार्टी का गठन किया था।
कुछ दिन पहले संपन्न विधानसभा चुनाव में इस नई पार्टी ने तमिलनाडु की सियासत का इतिहास बदल डाला। हालांकि टीवीके को पूर्ण बहुमत से दस सीटें कम मिल पाई थीं। ऐसे में सबसे पहले कांग्रेस ने आगे आकर जोसेफ विजय को समर्थन देने की घोषणा की थी। पार्टी के इस निर्णय का घर के भीतर भी विरोध देखने को मिला था। जोसफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी की मौजूदगी ने बड़े संकेत दिए थे, मगर कांग्रेस और टीवीके गठबंधन तथा राहुल और विजय की दोस्ती पर एकाएक राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है।
राजीव के दुश्मन को दे दी श्रद्धांजलि
देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर तमिलनाडु सीएम विजय जोसेफ द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि नहीं दी गई। विजय का यह बर्ताव खासकर कांग्रेसियों को काफी अखरा है। विवाद की असल वजह यह है कि जोसेफ विजय ने हाल ही में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के संस्थापक वी. प्रभाकरन की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। प्रभाकरन को राजीव गांधी हत्याकांड का मुख्य षड्यंत्रकर्ता माना जाता है। प्रभाकरन के संगठन पर भारत में प्रतिबंध भी लगा है। जोसफ विजय की इस सियासत पर सोशल मीडिया में हल्ला मच गया है।
खूब हो रही है आलोचना
कई यूजर्स ने उनके व्यवहार की आलोचना की है। कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह मामला शर्मनाक बन गया है। पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी तक नहीं कर पा रहा है। ऐसे में राहुल गांधी को भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वैसे राहुल खुद विवादित बयान देने के कारण देशभर में आलोचना का सामना कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को ‘गद्दार’ बताया था। इसके पहले वह ‘चौकीदार चोर है’ जैसे बयान देकर पीएम मोदी पर जुबानी हमला करने के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गए थे।
ऐसा प्रतीत होता है कि अपनी राजनीतिक विफलताओं से हताश और कुंठित होकर राहुल इस नतीजे पर पहुंच गए हैं कि पीएम के खिलाफ अपशब्द बोलकर उनकी लोकप्रियता बढ़ जाएगी और वे राजनीतिक रूप से उनका मुकाबला करने में सक्षम हो जाएंगे। समस्या यह है कि राहुल यह साधारण बात समझने को तैयार नहीं कि राजनीति की अपनी एक भाषा होती है और आलोचना-निंदा का यह मतलब नहीं होता कि किसी के प्रति अशोभनीय टिप्पणियां की जाने लगें। राहुल अपने बेतुके बयानों से चर्चा में जरूर आ जाते हैं, मगर इससे उन्हें राजनीतिक रूप से कुछ हासिल नहीं होता।
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अलबत्ता राहुल गांधी को परिपक्व राजनेता के तौर पर खुद को साबित करने की आवश्यकता है। उधर, प्रभाकरन जैसे दागी व्यक्ति जोसेफ विजय के लिए नायक हो सकते हैं, मगर देश की जनता की नजरों में वह खलनायक ही रहेंगे। विजय ने ‘खलनायक’ को श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी सियासी मजबूरी को भी उजागर कर दिया है।

