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100 रुपए तक जा सकते हैं चीनी के दाम, जानें देश में ऐसी नौबत क्यों आई; क्या सरकार इस संकट से बाहर निकल पाएगी

देश में पेट्रोल को सस्ता करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए शुरू की गई एथेनॉल नीति का असर अब आम आदमी की रसोई पर दिखने लगा है। पिछले एक महीने में देश भर में चीनी के दाम करीब 10% तक बढ़ चुके हैं।

महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी बाजार कोल्हापुर में थोक कीमतें अगस्त की शुरुआत से लगभग 20% उछलकर ₹5350 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। वर्तमान में देश के औसत खुदरा बाजार में चीनी ₹52 प्रति किलो बिक रही है, जबकि कई स्थानीय खुदरा बाजारों में इसके भाव ₹65 से ₹70प्रति किलो के पार निकल चुके हैं। अनुमान है कि आने वाले दिनों चीनी रेट 100 रुपए हो सकते हैं। इस मूल्यवृद्धि पर राजनीतिक हलकों में भी घमासान शुरू हो गया है, जहां विपक्ष सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहा है।

सप्लाई का गणित: 31 लाख टन चीनी एथेनॉल में डाइवर्ट

चीनी के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल भारत में अचानक पैदा हुई इस कमी की मुख्य वजह गन्ने के रस का फ्यूल की तरफ मुड़ना है। वर्ष 2025-26 के चीनी सीजन में कुल 3.11 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, जिसमें से करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का इस्तेमाल सीधे एथेनॉल उत्पादन में कर लिया गया। इसके चलते बाजार में आने वाली शुद्ध (नेट) चीनी घटकर 2.8 करोड़ टन रह गई, जबकि देश की घरेलू सालाना खपत 2.83 करोड़ टन है।

देश में चीनी का शेष स्टॉक घटे रहने का अनुमान

पुराने आंकड़ों के मुकाबले इस बार बफर स्टॉक पर भारी दबाव है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) के मुताबिक सितंबर 2026 तक देश में चीनी का शेष स्टॉक घटकर करीब 43 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 53 लाख टन था। 43 लाख टन का यह स्टॉक देश की सामान्य खपत के लिहाज से केवल 2 महीने का बैकअप है। ऐसे में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान कन्फेक्शनरी, पेय और घरेलू मांग में भारी इजाफे के चलते कीमतों पर चौतरफा दबाव बन गया है।

शेयर बाजार में हलचल और सरकार के कड़े कदम

कीमतों में तेजी के चलते चीनी मिलों के मार्जिन बढ़ने की उम्मीद से बलरामपुर चीनी, धामपुर शुगर, द्वारिकेश शुगर और बजाज हिंदुस्तान जैसी कंपनियों के शेयरों में 6% से 8% की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, बढ़ती महंगाई को थामने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

चीनी के निर्यात पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी है और 10 टन से अधिक चीनी रखने वाले थोक खरीदारों पर 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने पर रोक लगाने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त, घरेलू बाजार को स्थिर करने के लिए करीब एक दशक बाद 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के विदेश से मंगाने पर विचार किया जा रहा है।

ई20 नीति और ‘फूड वर्सेस फ्यूल’ का बड़ा सवाल

भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य 20% (E20) रखा है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 1953 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। कच्चे तेल के आयात और विदेशी मुद्रा में बचत जैसे फायदों के बावजूद, अब खाद्य सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है।

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मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में एथेनॉल के लिए मक्का या चावल के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पोल्ट्री, पशु आहार और मुख्य खाद्य सामग्री की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दौड़ में रसोई के बजट और खाद्य आपूर्ति के संतुलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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