EMI पर चीज़ें खरीदना कितना सही, आजकल कई लोग ऐसा कर रहें; इसका सच जानें
आजकल कई काम आसान हो गए हैं। पहले जिन कामों में काफी मेहनत और समय लगता था, वे अब चंद सेकंड में हो जाते हैं। इन्हीं सुविधाओं में से एक है Finance। आजकल Finance से जुड़ा सबसे बड़ा काम फ़ोन के ज़रिए चंद सेकंड में हो जाता है। जैसे Loan लेना। आजकल लोगों को बैंकों से Loan in India लेने का बहुत शौक़ है। कुछ लोग घर खरीदने के लिए Home Loan ले रहे हैं, तो कुछ कार खरीदने के लिए Car Loan। इतना ही नहीं अब लोग EMI पर फ़ोन (Phone on EMI, iPhone EMI, EMI on iPhone), AC on EMI, Cooler on EMI, Refrigerator on EMI और Air Ticket on ईएमआई भी ले रहे हैं।
आजकल कुछ भी खरीदना मुश्किल नहीं है। आप कम पैसों में Buying on EMI पर आसानी से कुछ भी खरीद सकते हैं। EMI Facility में आपको हर महीने ब्याज (Interest) सहित एक छोटी राशि चुकानी होती है। जब आप Buying on EMI पर कोई चीज़ खरीदते हैं, तो आपको वह चीज़ उसकी वास्तविक कीमत से ज़्यादा में मिलती है।
एक कर्ज का जाल है ईएमआई
Financial Expert तपस चक्रवर्ती (Tapas Chakravarty) ने अपने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में EMI को कर्ज़ का जाल (Debt Trap, Risk of Debt, Debt Problem, Borrowing Trap, Debt Cycle) बताया है और कहा है कि EMI का बोझ इन दिनों लोगों को कर्ज़ के जाल में फँसा रहा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि भारत के लोगों के लिए सबसे बड़ा जाल मुद्रास्फीति या कर नहीं बल्कि EMI है। आजकल लोगों की EMI ही उनके लिए सबसे बड़ा खतरा है।
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तपस चक्रवर्ती EMI कर्ज़ के जाल के सूत्र को सरल शब्दों में समझाते हैं: “कमाएँ, उधार लें (Borrowing), चुकाएँ, फिर दोहराएँ, बचत नहीं (No Savings), फिर से स्वाइप करें।” उन्होंने कहा कि EMI Facility लोगों का आर्थिक बोझ (Financial Burden) कम करने के लिए शुरू की गई थी लेकिन यह EMI धीरे-धीरे लोगों के लिए जीवन जीने का एक तरीका बनती जा रही है।
चक्रवर्ती आगे कहते हैं कि घरेलू कर्ज़ (India Household Debt) भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 42% तक पहुँच गया है। इसका एक बड़ा हिस्सा Credit Card, Personal Loan और “Buy Now Pay Later” विकल्पों से आता है। इतना ही नहीं, भारत में बिकने वाले 70 प्रतिशत iPhone EMI पर खरीदे जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर 5 में से 3 लोगों पर 3 से ज़्यादा Number of Loans हैं।


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