पॉलिटिक्सभारत

क्या सिर्फ 80 रुपए में बिक गया लोकतंत्र, राहुल के बाद एक और बड़ा खुलासा

Rahul Gandhi Vote Chori: देश में वोट चोरी का प्रकरण बहुत गरमाया हुआ है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार के विरुद्ध मोर्चा तक खोल रखा है। हालांकि कांग्रेस के आरोपों को इलेक्शन कमीशन के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी नकारती रही है। मगर इसी बीच कर्नाटक के कालाबुर्गी जिले के आनंद विधानसभा क्षेत्र में हुए वोट चोरी कांड की जांच में बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

एसआईटी ने किया बड़ा खुलासा

विशेष जांच दल यानी कि एसआईटी को पता चला है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान वोटर सूची से वोट डिलीट करने की साजिश रची गई थी। जांच में सामने आया कि प्रत्येक हटाए गए वोट के लिए संदिग्धों को 80 रुपए का भुगतान किया गया था। इसके साथ-साथ 6000 से ज्यादा वोटों के फर्जी तरीके से हटाए जाने के सबूत भी जुटाए गए हैं।

एसआईटी ने इस घोटाले में छह लोगों को मुख्य संदिग्ध मानते हुए उनके विरुद्ध कारवाई की तैयारी शुरू कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जांच अधिकारियों के मुताबिक यह पूरा काम आलंद के एक साइबर सेंटर में किया गया था। जहां ऑपरेटरों को प्रत्येक आवेदन के लिए ₹80 का भुगतान किया जाता था। एसआईटी सूत्रों का कहना है कि करीब 4.8 लाख की राशि उन लोगों को दी गई जिन्होंने इस वोटर डिलीशन ऑपरेशन को अंजाम दिया।

चुनाव प्रक्रिया में बड़ा घोटाला! राहुल गांधी का दावा, इन 5 तरीकों से चुराए गए वोट; पूछे ये सवाल

अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि आखिर यह साइबर सेंटर चुनाव आयोग के पोर्टल तक पहुंच कैसे हासिल कर पाया और फर्जी डिलीट एप्लीकेशन कैसे जमा किए गए। शुरू में इस मामले की जांच सीआईडी साइबर क्राइम यूनिट ने की थी। जिसके बाद एसआईटी ने मामले को अपने हाथ में ले लिया था। सीआईटी सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल यानी कि वीओआईपी के माध्यम से यह डिलीशन रिक्वेस्ट भेजी गई और सीआईडी अधिकारी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि करीब 6694 वोटर हटाने के लिए आवेदन किए गए थे। जिनमें से अधिकांश फर्जी थे।

एक ही महिला का नाम वोटर लिस्ट में 6 बार, EPIC नंबर अलग; देखे वीडियों

खासतौर पर दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाया गया। इन गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने तुरंत स्टेटस को आदेश दिया और सभी डिलीशन रोक दिए गए। जांच में गड़बड़ी की जड़ स्थानीय निवासी मोहम्मद अशफाक तक पहुंची। जिसे फरवरी 2023 में पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। वर्तमान में वह दुबई में मौजूद है और उसे ढूंढने के लिए ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। आनंद कलबुर्गी जिले का हिस्सा है। यह कांग्रेस विधायक बी आर पाटिल का निर्वाचन क्षेत्र भी है।

उन्होंने कलबुर्गी के मंत्री प्रयंक खड़के ने सबसे पहले इस गड़बड़ी की शिकायत मुख्य चुनाव अधिकारी से की थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने एसआईटी का गठन किया जिसकी अगुवाई एडीजीपी पी के सिंह कर रहे हैं। मामला तब राजनीति रंग में तब्दील हुआ जब Rahul Gandhi ने भी आनंद में Vote Chori के आरोप उठाए। यह क्षेत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के का गढ़ भी माना जाता है।

प्रियंक खड़के ने ट्वीट किया, “एक वोट की कीमत ₹80 थी”

एसआईटी की रिपोर्ट के आने के बाद मंत्री प्रियंक खड़के ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, आलंद में केवल ₹80 में वोटर डिलीट कर दिए गए। एसआईटी की जांच से हमारी बात साबित हो गई कि 6000 से ज्यादा वास्तविक मतदाताओं के नाम पैसे लेकर हटाए गए। एक पूरा डाटा सेंटर कलबुर्गी से संचालित हो रहा था। जहां से व्यवस्थित तरीके से मतदाताओं के नाम मिटाए जा रहे थे। यह हमारे लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ है। सभी सबूत बीजेपी नेताओं और उनके सहयोगियों के मिले होने की ओर इशारा कर रहे हैं।

bihar election 2025: महागठबंधन का मास्टर स्ट्रोक, अति पिछड़ा न्याय संकल्प जारी

बीजेपी के वोट चोरी प्ले बुक की हर चाल का पर्दाफाश होगा और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। खबर है कि 17 अक्टूबर को एसआईटी ने पूर्व बीजेपी विधायक सुभाष कोटेदार, उनके बेटों और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट मलिका अर्जुन महंत कोल के घरों पर भी छापेमारी की थी। जांच टीम ने इस दौरान सात लैपटॉप और कई मोबाइल फोन ज्त भी किए हैं।

तो वहीं कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया कि बीजेपी की वोट चोरी का सच अब देश के सामने है। एक वोट को हटाने की कीमत ₹80 थी। यह है बीजेपी चुनाव आयोग का खेल। फिलहाल इस खुलासे से कहीं ना कहीं बीजेपी और चुनाव आयोग की टेंशन बढ़ गई है। अब ऐसे में देखना होगा कि चुनाव आयोग और बीजेपी इस पर क्या सफाई और देती है।