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हिंडन नदी ने खोला राज: करोड़ों-अरबों कमाकर गायब हुए भू-माफिया, अब बेकसूरों को भुगतनी पड़ेगी सजा

प्राचीन हिंडन नदी एक बार फिर सरकारी विमर्श में है। नदी की बदहाली पर लखनऊ से गाजियाबाद और गाजियाबाद से दिल्ली तक पुन: कागजी कसरत और चिंता देखने को मिल रही है। लंबे समय से प्रदूषण की मार से बेहाल यह नदी बेशक स्वच्छ न हो पाए, मगर सरकारी मशीनरी अपनी ड्यूटी निभाने के प्रति गंभीर दिखाई पड़ रही है। गाजियाबाद में हिंडन के आसपास कुल 258 आवासीय कॉलोनियां बस चुकी हैं। जहां पौने चार लाख से अधिक नागरिक जीवन यापन कर रहे हैं। सच्चाई से मुंह नहीं फेरा जा सकता।

हिंडन अब जीवनदायिनी नहीं

वर्तमान में हिंडन महज एक प्रदूषित नाला बनकर रह गई है। नदी में घरों और फैक्ट्रियों का दूषित पानी निरंतर पहुंच रहा है। हिंडन अब जीवनदायिनी नहीं रही। वह खुद अपना अस्तित्व बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। उत्तर प्रदेश में सरकारें आती रहीं, जाती रहीं, सरकारी विभागों में अधिकारी आते रहे, जाते रहे, नदी की स्वच्छता के लिए कागजों पर एक्शन प्लान बनते रहे, मगर जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई है।

हिंडन के आसपास डूब क्षेत्र की भूमि पर निर्माण करना गैरकानूनी कृत्य बेशक हो, मगर गाजियाबाद में भू-माफिया ने इन नियमों की कभी परवाह नहीं की। नदी किनारे सस्ती भूमि की लालसा में सीधे-साधे और भोले भाले परिवार फंसते रहे। जिन्हें औने-पौने दामों पर डूब क्षेत्र की जमीन बेचकर कुछ भू-माफिया करोड़पति-अरबपति बन गए।

उप्र सरकार की तरफ से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में प्रस्तुत रिपोर्ट वाकई चिंता पैदा करती है। खबर आ रही है कि ढाई सौ अधिक अवैध कॉलोनियों पर भविष्य में बुलडोजर एक्शन हो सकता है। इस खबर ने लाखों परिवारों की नींद उड़ा दी है। आज के दौर में एक अदद आशियाना बनाना कोई हंसी का खेल नहीं है। खासकर गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार को सपनों का घर बनाने के लिए कई बार लोहे के चने बचाने पड़ जाते हैं।

कौन कौन दोषी

नदी की स्वच्छता हेतु अवैध निर्माण को तोड़ा ही जानी चाहिए, मगर कसूर सिर्फ उन परिवारों का है, जिन्होंने डूब क्षेत्र में जमीन खरीद कर पक्के मकान बना लिए हैं। नहीं, दोषी जमीन विक्रेता और वह अधिकारी भी हैं, जिनके कंधों पर डूब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी थी। उन्हें आखिर तनख्वाह किस बात की मिलती रही। सरकार को सभी भू-माफिया और उस समय गाजियाबाद में तैनात रहे अधिकारियों को भी सूचीबद्ध कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। पिछले कुछ साल से मानसून के मौसम में नदी किनारे की कुछ कॉलोनियों में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो रहे हैं।

मानसून आने से पहले सिंचाई विभाग की तरफ से प्रतिवर्ष एक चेतावनी जारी की जाती है। चेतावनी में डूब क्षेत्र को खाली करने की सलाह दी जाती है, मगर सरकारी चेतावनी का कोई असर दूर दूर तक देखने को नहीं मिलता। लोनी और साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में नदी किनारे अतिक्रमण की भरमार है। इसके अलावा उन कारखाना मालिकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है, जिनकी वजह से नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है।

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बता दें कि हिंडन का जल अब आचमन करने लायक भी नहीं रह गया है। समय-समय पर रिपोर्ट आती रही हैं कि नदी में बढ़ते प्रदूषण से जलीय जीवों का अस्तित्व भी संकटग्रस्त हो रहा है। इसके बावजूद न सरकारें चेतीं, न सरकारी अधिकारियों पर कोई असर पड़ा। हिंडन को साफ-सुथरा रखने के लिए आमजन का सहयोग भी जरूरी है। जन सहयोग के बिना यह मुहिम कतई सफल नहीं हो पाएगी।

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