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क्या अब टूटेगी सपा, अखिलेश यादव का किला ढहाने के लिए चल रहा है ‘गुप्त मिशन’

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना यूबीटी के बाद क्या अब समाजवादी पार्टी (सपा) में ‘फूट’ का बम फूटने वाला है। क्या कुछ सांसद और विधायक सपा के खिलाफ बगावत के मूड में हैं? पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे की तरह क्या अगला झटका अखिलेश यादव को लगेगा? सपा में तोड़फोड़ के लिए क्या कोई गुप्त मिशन चल रहा है?

योगी सरकार में मंत्री ओपी राजभर के दावों के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का बाजार गरम है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में बागियों के कारण सियासी पारा चढ़ा हुआ है। देशभर में दोनों राज्यों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इस बीच ओपी राजभर के बयानों ने यूपी में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि सपा में बड़ी टूट होने वाली है।

रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखी चिट्ठी

सपा नेता रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने सवाल उठाया कि खनन घोटाले और रिवर फ्रंट घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है, यह पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। जिस पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के ‘अफवाह मंत्री’ का नाम ओपी राजभर है। बकौल अखिलेश, राजभर ने काली कमाई के दम पर बड़े-बड़े बोल बोले थे। इसके इतर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि सपा के लगभग 26 विधायक दल-बदल करने की तैयारी में हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश से सपा नहीं चल पा रही है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर सभी दलों ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। 2017 में भाजपा ने सपा को सत्ता से बाहर कर दिया था। 2022 के चुनाव में भी सपा की सत्ता में वापसी की कोशिशें नाकाम रही थीं। क्या 2027 में चुनावी दौड़ में ‘साइकिल’ विजेता बन पाएगी, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो रही है।

यूपी में पिछले 9 साल से भाजपा सत्ता में है। इस अवधि में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी अलग पहचान और छवि बनाई है। वह अब सिर्फ गोरखपुर के लोकप्रिय नेता नहीं रह गए हैं। उनके समर्थकों की संख्या बढ़ चुकी है। उनकी कार्यशैली को विभिन्न राज्यों में पसंद किया जाने लगा है। निश्चित से यूपी में अगला विधानसभा चुनाव भाजपा जहां योगी आदित्यनाथ को आगे रखकर लड़ेगी, वहीं सपा में सीएम पद का चेहरा अखिलेश यादव रहेंगे।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी चुनावी मोड में दिखाई पड़ रही है। बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो सपा-कांग्रेस एक बार फिर गठबंधन के जरिए चुनाव में उतर सकती हैं।

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एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी तथा सांसद चंद्रशेखर भी किसी न किसी दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी (आप) की तरफ से अभी तस्वीर साफ नहीं है। कुल मिलाकर यूपी का अगला विधानसभा चुनाव न सिर्फ बेहद दिलचस्प होगा बल्कि कई नेताओं की प्रतिष्ठा व कद की भी परीक्षा लेगा।

यूपी की राजनीति में आ सकता है नया तूफान

टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में जिस प्रकार से सांसदों और विधायकों ने बागी तेवर अपना रखे हैं, यदि वैसी स्थिति सपा में भी पैदा होती है तो यूपी की राजनीति में नया तूफान आ सकता है। वैसे चुनाव से पहले नेताओं के विचार व आस्था बदलने का खतरा बढ़ जाता है। चुनाव में जिस दल का पलड़ा भारी नजर आता है, उसके प्रति दूसरे दलों के नेताओं के मन में अचानक प्रेम उमड़ने लगता है।

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