दिल्ली के जंतर-मंतर से अलग है रांची का ये आंदोलन, जानें क्यों हेमंत सरकार के गले की फांस बनी JPSC-JSSC धांधली
“सरकार लाठी, गोली और बंदूक से नहीं चलती, यह नागरिकों को संतुष्ट रखकर चलाई जाती है।” झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का यह बयान मौजूदा हालात की गंभीरता को बयां करता है। राजधानी रांची में छात्रों का गुस्सा अब चरम पर है और हेमंत सोरेन सरकार के लिए यह आंदोलन एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विधानसभा घेराव और छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज
झारखंड की राजधानी रांची में परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर हजारों छात्र सड़क पर उतर आए हैं। विधानसभा भवन का घेराव करने जा रहे इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। छात्रों के हक के लिए देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा काफी हाई हो गया है। सरकार की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर से अलग है रांची का आंदोलन
अगर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से इसकी तुलना की जाए, तो रांची का यह छात्र आंदोलन अपनी शालीनता के लिए अलग पहचान बना रहा है। यहां न तो कोई देशद्रोही नारेबाजी हुई और न ही प्रधानमंत्री या शिक्षा मंत्री के खिलाफ किसी अपशब्द का इस्तेमाल किया गया। झारखंड के युवाओं ने अपनी तार्किक मांगों को पूरी समझदारी के साथ उठाया है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि जब केंद्र सरकार भारी दबाव में शिक्षा मंत्री से इस्तीफा ले सकती है, तो झारखंड सरकार सीबीआई जांच की जायज मांग को स्वीकार करने से क्यों कतरा रही है?
सीएम हेमंत सोरेन का खुला खत और भाजपा का समर्थन
स्थिति को हाथ से निकलता देख मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के नाम एक खुला खत लिखा है। इस खत में उन्होंने संवाद और भरोसे के जरिए मुद्दे के समाधान की अपील की है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सरकारें तब तक सक्रिय क्यों नहीं होतीं, जब तक नौबत विधानसभा या संसद मार्च तक नहीं पहुंच जाती? जायज मांगों के प्रति सिर्फ सहानुभूति जताना ही काफी नहीं होता, बल्कि ठोस एक्शन की जरूरत होती है। इस बीच, झारखंड में इस छात्र आंदोलन को भाजपा (BJP) का खुला समर्थन मिल रहा है, जो राज्य में उसी तरह विपक्ष की भूमिका निभा रही है जैसे दिल्ली में अन्य दलों ने निभाई थी।
GenZ Protest में सबसे ज्यादा वायरल हो रहे ये मीम्स, जानिए क्या है इनका मतलब
जेन-जी (Gen-Z) का स्पष्ट संदेश: वादे नहीं, परिणाम चाहिए
भारत एक युवा देश है जिसकी आधी से ज्यादा आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है। आज के युवाओं यानी जेन-जी (Gen-Z) का संदेश बिल्कुल साफ है—उन्हें केवल कोरे वादे, नीतियां और चुनावी भाषण नहीं, बल्कि पारदर्शी परिणाम चाहिए। झारखंड की सड़कों पर उतरे छात्र अब उस सिस्टम से सीधे जवाबदेही मांग रहे हैं जो उनके भविष्य का फैसला करता है। इस आंदोलन ने देश की दो सबसे बड़ी चुनौतियों—शिक्षा और बेरोजगारी—को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। सरकारों को यह समझना होगा कि बदलते भारत के युवाओं को अब और गुमराह नहीं किया जा सकता; उन्हें एक ऐसा पारदर्शी शिक्षा तंत्र चाहिए जो उनका भरोसा कायम कर सके।

