भारत के सामने दोहरी चुनौती: एक तरफ महंगी चीनी, दूसरी तरफ चीन की चाल! सरकार ने कसी कमर
देश में इस समय ‘चीन और चीनी’ दो ऐसे मुद्दे बन चुके हैं जो सीधे तौर पर आम जनजीवन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं।
एक तरफ घरेलू बाजार में शक्कर (चीनी) की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ता की जेब पर असर डाल रही हैं, तो दूसरी तरफ सीमा पर चीन की चालबाजियां कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब देश में रक्षाबंधन और आगामी प्रमुख त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। सरकार के त्वरित कदमों के बाद बाजार में चीनी की कीमतों में मामूली नरमी तो दर्ज हुई है, लेकिन पूर्ण राहत के लिए लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
त्योहारी सीजन में शक्कर महंगी, चाय की चुस्कियों और मिठाइयों पर असर
भारत में चाय की खपत घर-घर में सबसे ज्यादा होती है और ऐसे में चीनी के दाम चढ़ने का सीधा असर आम परिवार के बजट पर पड़ता है। रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के नजदीक आते ही मिठाइयों के दाम बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
इस बीच बाजार में जमाखोरों के सक्रिय होने का जोखिम भी बना हुआ है। हालांकि केंद्र सरकार ने कीमतों को थामने और आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। विपक्षी दलों द्वारा इथेनॉल नीति को कीमतों में उछाल की वजह बताए जाने के दावों को खारिज करते हुए सरकार का कहना है कि कमजोर मानसूनी असर और अल नीनो के प्रभाव से उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिसकी भरपाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले एनएसए अजीत डोभाल की बीजिंग यात्रा अहम
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत में आयोजित होने वाले आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर हलचल तेज है। इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की मजबूत संभावना जताई जा रही है। इससे ठीक पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का चीन दौरा द्विपक्षीय बातचीत की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और सीमावर्ती इलाकों में बीजिंग की विस्तारवादी नीतियों और सोशल मीडिया पर हिमाचल प्रदेश सीमा को लेकर आई खबरों के बीच दोनों देशों के संबंधों में विश्वसनीयता की कमी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
वैश्विक संतुलन: पीएम मोदी और शी जिनपिंग की संभावित बैठक पर टिकी नजरें
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अलग द्विपक्षीय वार्ता का मंच तैयार करने में सुरक्षा एजेंसियां और राजनयिक जुटे हैं। मध्य एशिया की रणनीति, रूस के साथ मजबूत रिश्ते और पश्चिमी देशों व पूर्वी ब्लॉक के बीच कूटनीतिक संतुलन साधने के लिए बीजिंग के साथ तनाव कम करना भारत के लिए जरूरी माना जा रहा है।
100 रुपए तक जा सकते हैं चीनी के दाम, जानें देश में ऐसी नौबत क्यों आई; क्या सरकार इस संकट से बाहर निकल पाएगी
दूसरी ओर, चीन खुद इस समय घरेलू स्तर पर प्रॉपर्टी संकट, मंदी और रोजगार की चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसके चलते उसके अति-उत्पादन का दबाव वैश्विक बाजारों पर देखा जा रहा है। भारत अपनी रणनीतिक बढ़त और घरेलू आर्थिक स्थिरता दोनों को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कूटनीतिक व आर्थिक फैसले ले रहा है।

