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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, क्या सच में छिन जाएगी कुर्सी; दिल्ली से मुंबई तक मचा घमासान

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी गलियारों में भारी घमासान छिड़ चुका है। विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी का यह बयान चर्चा में है कि पार्टी को ज्ञानेश जी का नहीं बल्कि भगवान गणेश जी का आशीर्वाद हासिल है। इस तंज पर समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि गणेश जी कभी गलत चीजों का साथ नहीं देते। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई तक विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं।

इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन

विपक्षी खेमा लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन कर रहा है। कांग्रेस समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता जहां दिल्ली के राजनीतिक मंचों से आयोग को घेर रहे हैं, वहीं मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जैसी नई जमातें भी इस विरोध को हवा देने में जुटी हैं। सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके के तीखे बयानों और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का हवाला देकर केंद्र सरकार को दी गई खुली चुनौतियों ने इस विवाद को और गरमा दिया है। इससे पहले भी नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के दौरान जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों में इस संगठन के नेताओं द्वारा तीखी बयानबाजी सामने आई थी, जिसके चलते सत्ता पक्ष इसे विपक्ष का प्रायोजित ड्रामा करार दे रहा है।

क्या मतदाता सूची की सफाई से घबराया विपक्ष?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे टकराव की असली जड़ मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया है। केंद्र सरकार का स्पष्ट रुख है कि वोटर लिस्ट को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और फर्जी व अवैध रूप से जोड़े गए नामों को हटाया जाए। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ है कि देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों ने फर्जी पहचान पत्रों, राशन कार्ड, आधार कार्ड और जाति प्रमाण पत्रों के सहारे वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करा लिए हैं। राजनीतिक स्तर पर यह आरोप लग रहे हैं कि कई दल इन अवैध प्रवासियों को अपने पक्के वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं।

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वोट बैंक की राजनीति और गोपनीयता का सवाल

विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि एसआईआर प्रक्रिया के बहाने सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसे मतदाताओं के नाम कटवा रहा है जो पारंपरिक रूप से गैर-भाजपा दलों का समर्थन करते हैं। इसके विपरीत सत्ता पक्ष का तर्क है कि भारत की चुनावी प्रणाली में मतदान पूरी तरह गोपनीय होता है, ऐसे में विपक्ष यह दावा कैसे कर सकता है कि कटने वाले नाम सिर्फ उनके समर्थकों के ही हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक केंद्र की सत्ता से बाहर रहने की हताशा के चलते विपक्ष हर प्रशासनिक सुधार और संवैधानिक संस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल सीईसी ज्ञानेश कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही यह तकरार आने वाले दिनों में और तीव्र होने के आसार हैं।

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