सपा को तोड़ने चले थे राजभर, सुभासपा में बड़ी टूट का काउंटडाउन शुरू!
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय जुबानी टकराव तेज हो गया है। ओम प्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी पर हमले करते रहे हैं और दावा करते आए हैं कि सपा के कई नेता जल्द अलग हो सकते हैं। मगर अब स्थिति उलटती नजर आ रही है। उनके ही दावे पर सवाल उठने लगे हैं।
उनके बेटे अरुण राजभर के एक बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। एक चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ विधायक अलग-अलग राजनीतिक संकेतों के साथ नजर आते हैं। इसी बात ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अरुण राजभर ने एक बहस में कहा है कि बसपा के कई विधायक समाजवादी पार्टी का झंडा लगाकर घूमते हैं। यह बात सामने आते ही सपा को राजभर पर हमला करने का मौका मिल गया है।
चार विधायकों को लेकर उठी चर्चा
अरुण राजभर ने बातचीत के दौरान यह भी माना कि करीब चार विधायक ऐसे हैं जो अलग राजनीतिक झंडे के साथ सक्रिय दिखते हैं। इस बयान के बाद सपा ने पलटवार शुरू कर दिया है।
सपा नेताओं का कहना है कि जब दूसरे दल पर टूट का दावा किया जाता है तो पहले अपनी पार्टी की स्थिति भी देखनी चाहिए। इसी वजह से यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है।
अब्बास अंसारी का नाम फिर चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान अब्बास अंसारी पर जा रहा है। वह मऊ सदर से विधायक हैं और पूर्व में सुभासपा से जुड़े रहे हैं।
2022 के समय सुभासपा और सपा के बीच गठबंधन था। उस दौरान दोनों दलों के नेता एक साथ मंच साझा करते दिखाई दिए थे। अब फिर से यह चर्चा तेज है कि क्या अब्बास अंसारी सपा के करीब जा सकते हैं।
मऊ और आसपास के क्षेत्रों जैसे गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ में अंसारी परिवार का राजनीतिक असर माना जाता है। इसलिए यह चर्चा सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं दिख रही है।
पूर्वांचल की राजनीति पर असर
पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर की मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनका आधार छोटे सामाजिक समूहों के बीच रहा है। इसी वजह से वे लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।
मगर मौजूदा बयानबाज़ी ने उनकी पार्टी की एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर विधायक किसी दूसरी पार्टी की ओर झुकते दिखते हैं तो इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है।
अखिलेश यादव के लिए बढ़ता राजनीतिक अवसर
इस पूरे विवाद को सपा एक मौके की तरह भी देख रही है। पार्टी का कहना है कि अगर अन्य दलों के नेता उनके साथ जुड़ते हैं तो यह पूर्वांचल में संगठन को मजबूत करेगा।
सपा यह भी तर्क देती है कि केवल चुनावी नारे नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर नेताओं का साथ जरूरी होता है। ऐसे में अंसारी परिवार से जुड़ी चर्चाएं सपा के लिए राजनीतिक बढ़त का संकेत मानी जा रही हैं।
अभी स्थिति साफ नहीं
फिलहाल किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। सभी चर्चाएं राजनीतिक अटकलों पर आधारित हैं।
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अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अब्बास अंसारी और अन्य विधायक वास्तव में कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हैं या यह सिर्फ बयानबाज़ी और क्षेत्रीय समीकरणों का असर है।

