Monsoon Skin Care: बारिश में त्वचा की खुजली और दाद को न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं ये 6 गंभीर इंफेक्शन
Monsoon Skin Care: बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन यही मौसम त्वचा के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार नमी, पसीना और गीले कपड़ों में रहने की आदत बैक्टीरिया, फंगस और वायरस को तेजी से बढ़ने का मौका देती है। ऐसे में छोटी दिखने वाली समस्या भी समय पर ध्यान न देने पर गंभीर संक्रमण का रूप ले सकती है।
अगर त्वचा पर खुजली, लाल दाने या जलन जैसे शुरुआती संकेत दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर देखभाल करने से कई बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।
मानसून में संक्रमण का खतरा क्यों बढ़ जाता है
बारिश के दौरान वातावरण में नमी काफी बढ़ जाती है। कई लोग देर तक गीले कपड़े या जूते पहने रहते हैं। पसीना भी सामान्य से ज्यादा आता है। इन सभी कारणों से त्वचा लंबे समय तक नम रहती है और यही स्थिति संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं और फंगस के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनमें जोखिम और अधिक रहता है।
1. फंगल इंफेक्शन
यह संक्रमण उन हिस्सों में सबसे ज्यादा होता है जहां त्वचा एक-दूसरे से सटी रहती है। जैसे जांघों के बीच, बगल, कमर, गर्दन और पैरों की उंगलियों के बीच।
पहचान कैसे करें
- तेज खुजली
- लाल गोल निशान
- जलन
- त्वचा का छिलना
- बदबू आना
बचाव
रोज साफ और सूखे कपड़े पहनें। सूती कपड़ों का इस्तेमाल करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीफंगल क्रीम लगाएं।
2. एथलीट फुट
बारिश में गीले जूते और मोजे लंबे समय तक पहनने से पैरों की उंगलियों के बीच संक्रमण हो सकता है जिसे एथलीट फुट कहा जाता है।
लक्षण
- उंगलियों के बीच खुजली
- जलन
- सफेद होकर छिलती त्वचा
- कभी-कभी दर्द वाले घाव
बचाव
पैर धोने के बाद उन्हें पूरी तरह सुखाएं। गीले जूते पहनने से बचें और साफ सूती मोजे पहनें।
3. दाद या रिंगवर्म
यह एक तेजी से फैलने वाला फंगल संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या उसके कपड़े, तौलिया और पालतू जानवरों के जरिए भी फैल सकता है।
लक्षण
- गोल आकार के लाल चकत्ते
- किनारों का उभरा होना
- तेज खुजली
- जलन
बचाव
दूसरों की निजी चीजों का इस्तेमाल न करें। लक्षण दिखते ही त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराएं ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
4. स्किन एलर्जी और रैशेज
बारिश का गंदा पानी, धूल, कीड़ों के काटने या किसी एलर्जी पैदा करने वाली चीज के संपर्क में आने से त्वचा पर तुरंत असर दिखाई दे सकता है।
लक्षण
- लाल चकत्ते
- सूजन
- खुजली
- छोटे दाने
- जलन
बचाव
गंदे पानी और जलभराव वाले इलाकों से बचें। बाहर से लौटने के बाद साफ पानी से नहाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवा या लोशन का उपयोग करें।
5. मानसून में घमौरियां
घमौरियां केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रहतीं। बारिश की उमस भी पसीने की ग्रंथियों को बंद कर सकती है जिससे यह समस्या बढ़ जाती है।
लक्षण
- गर्दन पर दाने
- पीठ और छाती पर लाल चकत्ते
- बगल में खुजली
- चुभन
बचाव
हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनें। शरीर को जितना हो सके सूखा और ठंडा रखें।
6. एक्ने और पिंपल्स
नमी बढ़ने पर त्वचा ज्यादा तेल बनाने लगती है। तेल, धूल और पसीना मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे मुंहासे बढ़ जाते हैं।
लक्षण
- चेहरे पर पिंपल्स
- पीठ पर मुंहासे
- ब्लैकहेड्स
- व्हाइटहेड्स
बचाव
दिन में दो बार ऑयल-फ्री या जेल बेस्ड फेस वॉश से चेहरा साफ करें। बार-बार चेहरे को हाथ लगाने से बचें।
त्वचा को सुरक्षित रखने के आसान उपाय
- रोज नहाकर शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।
- गीले कपड़े तुरंत बदलें।
- सूती कपड़ों को प्राथमिकता दें।
- साफ तौलिया और व्यक्तिगत सामान किसी के साथ साझा न करें।
- त्वचा में किसी भी तरह का बदलाव दिखे तो इलाज में देरी न करें।
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मानसून का मौसम आनंददायक जरूर होता है लेकिन इस दौरान त्वचा की देखभाल पहले से ज्यादा जरूरी हो जाती है। थोड़ी सी सावधानी और अच्छी स्वच्छता अपनाकर अधिकांश संक्रमणों से बचा जा सकता है। यदि खुजली, लाल चकत्ते, घाव या किसी भी तरह का संक्रमण लगातार बना रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

