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How to prevent asthma: कड़कड़ाती सर्दी में अस्थमा मरीज हो जाएं सावधान नहीं तो पड़ जाएंगे लेने के देने

How to prevent asthma: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। सवेरे की धुंध और गिरता पारा अपने साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां लेकर आया है। इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो अस्थमा या सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं। अक्सर हम यह मानते हैं कि अस्थमा का असर केवल फेफड़ों तक ही सीमित रहता है मगर मेडिकल साइंस की मानें तो यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। मौजूदा दौर का प्रदूषण और शीत लहर आपके पेट से लेकर आंतों तक को बीमार कर सकती है। इसे डॉक्टर ‘अस्थमा एंड गट कनेक्शन’ के नाम से जानते हैं।

क्यों और कैसे बिगड़ता है पेट का संतुलन

अस्थमा के मरीजों के लिए प्रदूषण का यह दौर दोहरा संकट लेकर आता है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर राजीव कक्कड़ बताते हैं कि जब हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो सांस लेना दूभर हो जाता है। बहुत से मरीज नाक की जगह मुंह से सांस लेने लगते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है क्योंकि नाक के बाल हवा को फिल्टर करते हैं जबकि मुंह से सीधे प्रदूषित कण शरीर के भीतर चले जाते हैं।

यह छोटे कण केवल फेफड़ों में नहीं रुकते बल्कि भोजन की नली के जरिए सीधे पेट और आंतों तक पहुंच जाते हैं। इससे आंतों की अंदरूनी परत में सूजन आने लगती है। यही वजह है कि अस्थमा के मरीजों में कब्ज, एसिडिटी और आईबीएस जैसी समस्याएं अचानक बढ़ जाती हैं। जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती तो पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है जिससे पेट में भारीपन महसूस होने लगता है।

शरीर के हर हिस्से पर प्रदूषण का प्रहार

वायुमंडल में मौजूद 2.5 माइक्रोन से छोटे कण इतने खतरनाक होते हैं कि वे फेफड़ों से होते हुए सीधे हमारे रक्त प्रवाह में मिल जाते हैं। खून के जरिए ये कण दिल, किडनी और हड्डियों तक पहुंच जाते हैं।

डॉक्टर कक्कड़ के अनुसार इस मौसम में हड्डियों का कमजोर होना या धमनियों में सूजन आना आम बात है। प्रदूषण और ठंड के इसी घातक तालमेल के कारण सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। जब रक्त संचार प्रभावित होता है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी भी घट जाती है जिससे वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के कारगर तरीके, क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts for Asthma)

अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में खास सावधानी बरतनी चाहिए ताकि वे अस्पताल जाने की नौबत से बच सकें। विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए मददगार साबित होंगे-

  • मास्क को बनाएं ढाल: घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का मास्क जरूर पहनें ताकि प्रदूषित हवा सीधे आपके सिस्टम में न जाए।
  • दवाइयों में लापरवाही न बरतें: अपनी नियमित दवाएं और इन्हेलर हमेशा अपने पास रखें। जरा सी भी बेचैनी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
  • खान-पान पर नियंत्रण: तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन पाचन तंत्र पर दबाव डालता है। खट्टे फलों का सेवन सीमित रखें क्योंकि इनसे कुछ लोगों को ट्रिगर मिल सकता है।
  • थोड़ा-थोड़ा खाएं: एक बार में ज्यादा भोजन करने (ओवर ईटिंग) के बजाय छोटे-छोटे अंतराल पर हल्का खाना खाएं। इससे पेट पर दबाव कम रहेगा और सांस लेने में आसानी होगी।

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सर्दियों का यह मौसम आनंद लेने के लिए है मगर अपनी सेहत की कीमत पर नहीं। सावधानी और सही जानकारी ही आपको इस दोहरे खतरे से सुरक्षित रख सकती है।

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