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कोलकाता में दर्दनाक हादसा: 18 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत, जानें पूजा पंडाल हादसे की इनसाइड स्टोरी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में उत्सव का माहौल उस वक्त चीख-पुकार में बदल गया, जब एक भव्य दुर्गा पूजा पंडाल मानवीय चूक और घोर प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया। कोलकाता के प्रमुख इलाके चोरबागान में आयोजित इस बड़े पंडाल में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने की भारी कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इस दर्दनाक घटना में डेढ़ दर्जन से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जबकि दर्जनों श्रद्धालु जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। पूरे पश्चिम बंगाल में इस वक्त गहरा सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है।

जांच में खुली पोल: संकरा निकास और अप्रशिक्षित वॉलंटियर्स

प्रारंभिक पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सिस्टम की भारी खामियों की ओर इशारा करते हैं। आयोजन स्थल पर प्रवेश और निकास के लिए जो रास्ता तैयार किया गया था, वह अप्रत्याशित भीड़ के दबाव को झेलने लायक कतई नहीं था। इसके साथ ही पंडाल के भीतर और आसपास रोशनी के पुख्ता इंतजाम नहीं थे, जिससे अफरा-तफरी के दौरान स्थिति और बदतर हो गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि हजारों की भीड़ को संभालने का जिम्मा जिन स्वयंसेवकों को सौंपा गया था, उन्हें क्राउड कंट्रोल की कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। सिर्फ आयोजक ही नहीं, बल्कि वे संबंधित सरकारी विभाग भी बराबर के दोषी हैं जिन्होंने कागजों पर क्लीयरेंस तो थमा दी, लेकिन जमीनी हकीकत परखने की जहमत नहीं उठाई।

सियासी गलियारों में हड़कंप और मुआवजे का ऐलान

इस दर्दनाक त्रासदी पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है, साथ ही अस्पताल में भर्ती घायलों को सर्वोत्तम उपचार मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। जनाक्रोश को देखते हुए पूजा समिति के कुछ पदाधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। वहीं टीएमसी और कांग्रेस ने मौजूदा भाजपा सरकार और पुलिस तंत्र पर तीखा हमला बोलते हुए इसे आपराधिक लापरवाही करार दिया है।

अतीत के हादसों से सबक सीखने में विफलता

दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में हुए पूर्व के भगदड़ हादसों से व्यवस्था ने कोई सबक नहीं सीखा है। हर बड़े हादसे के बाद उच्चस्तरीय जांच, कमेटी गठन और सख्त नियमों के वादे होते हैं, लेकिन कागजी नियमों की धज्जियां अगले ही आयोजन में उड़ने लगती हैं। चंद लोगों की गिरफ्तारी को महज खानापूर्ति माना जा रहा है, जब तक कि आयोजन की अनुमति देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती।

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आगामी त्योहारों के लिए खतरे की घंटी

वर्तमान में देश भर में शारदीय नवरात्र और रामलीला महोत्सव पूरे चरम पर हैं। आगामी विजयदशमी पर रावण दहन देखने के लिए विभिन्न शहरों के मैदानों में लाखों की तादाद में जनसैलाब उमड़ेगा। कोलकाता के चोरबागान की यह त्रासदी सभी राज्यों के स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभागों और आयोजन समितियों के लिए एक सख्त चेतावनी है। जब तक एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स, मेडिकल बैकअप, पर्याप्त लाइटिंग और पेशेवर सुरक्षा व्यवस्था की पूर्व-समीक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक ऐसे भव्य आयोजन जोखिम भरे बने रहेंगे।

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