संगठन बचाने चले थे, खुद ही सड़क पर आ गए! क्या यूपी में 2027 से पहले पूरी तरह बिखर जाएगी कांग्रेस
राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस की कार्यशैली के दो बिल्कुल उलट चेहरे उजागर हुए हैं। एक तरफ जहां दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी और शीर्ष नेतृत्व चुनाव आयोग व केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, वहीं दूसरी ओर लखनऊ स्थित यूपी कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता और बड़े पदाधिकारी खुलेआम आपस में गुत्थमगुत्था होते दिखे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में यह सियासी महाभारत उस वक्त शुरू हुई जब नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ औपचारिक रूप से अपना पदभार संभालने पहुंची थीं। नए नेतृत्व के स्वागत के ऐतिहासिक मौके पर मर्यादाएं तार-तार हो गईं और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अजय राय तथा महिला पार्षद ममता चौधरी के बीच की पुरानी रंजिश हिंसक झड़प में तब्दील हो गई।
जमकर चले जूते और गाली-गलौज, वीडियो हुआ वायरल
कार्यकर्ताओं और नेताओं की भारी भीड़ के बीच दोनों गुटों के समर्थकों में पहले तीखी नोंकझोंक हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गई। हंगामे के दौरान हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि एक आक्रोशित कार्यकर्ता खुलेआम जूता चलाते हुए कैमरे में कैद हो गया। इस पूरे हाईवोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया, जिससे पार्टी को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। हालांकि मौके पर मौजूद पार्टी के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी और सांसद इमरान मसूद ने बीच-बचाव कर जैसे-तैसे मामले को शांत कराया, लेकिन दोनों पक्षों के तेवर देखकर साफ है कि यह खींचतान इतनी जल्दी शांत होने वाली नहीं है।
मिशन 2027 और नेतृत्व परिवर्तन पर भारी गुटबाजी
उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर खुद को पुनर्जीवित करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस ने बड़ा सांगठनिक फेरबदल करते हुए अजय राय की जगह आराधना मिश्रा को कमान सौंपी थी। लेकिन प्रदेश मुख्यालय में पहले ही दिन भड़की इस कलह ने साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर पार्टी किस कदर धड़ेबाजी की शिकार है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि राजधानी लखनऊ के मुख्यालय में कार्यकर्ताओं का यह हाल है, तो प्रदेश के बाकी जिलों में संगठन की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पद से हटाए जाने के बाद अजय राय खेमे में सम्मान की कमी को लेकर नाराजगी की खबरें हैं, जो चुनावी तैयारियों में उनकी सक्रियता को प्रभावित कर सकती हैं।
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दिल्ली में प्रदर्शन बनाम यूपी में सपा के साथ सीट शेयरिंग की उलझन
एक तरफ पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व—मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी—दिल्ली में चुनाव आयोग और एसआईआर विवाद पर सारी ऊर्जा लगा रहा है, वहीं यूपी जैसे निर्णायक राज्य में पार्टी की जमीन लगातार खिसकती जा रही है। नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं से लेकर विधानसभा तक कांग्रेस पहले ही हासिये पर है। इसके ऊपर राज्य में समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग के मोर्चे पर भी विश्वास की भारी कमी साफ दिख रही है। सपा नेताओं द्वारा पिछले दिनों दिए गए तीखे बयानों ने कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि महज चेहरा बदलने या दिल्ली में प्रदर्शन करने से यूपी में पार्टी की वापसी संभव नहीं है, जब तक कि हाईकमान स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित कर इस अंतरकलह को खत्म नहीं करता।

