वर्ल्डहोम

समझौते के बावजूद सीमा पर खून-खराबा, तालिबान-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम क्यों टूटा; जानें अंदर की बात

2025 Afg Pak conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल ही में हुए संघर्ष विराम समझौते के बावजूद सीमा पर हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। अक्टूबर में दोनों देशों के बीच दोहा में संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे मगर उसके बाद भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। खासकर अफगानिस्तान के तालीबान शासन के साथ पाकिस्तान की सीमा पर लगातार सैन्य झड़पें हो रही हैं। स्पिन बोल्डक कस्बे के पास पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी से यह स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। अफगानिस्तान ने इस हमले का जवाब दिया, जिसके बाद सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच टकराव बढ़ा।

कूटनीतिक प्रयासों में विफलता

तुर्की के इस्तांबुल में शांति वार्ता के दौरान जब दोनों देशों के प्रतिनिधि समझौते के लिए बैठकर बातचीत कर रहे थे, उसी समय सीमा पर सैन्य गतिविधियां चल रही थीं। यह दिखाता है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक प्रयासों में बड़ी कमी है। इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता के बाद दूसरे दौर की बैठक भी बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गई। अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ही इस वार्ता से कुछ उम्मीदें लगाए बैठे थे मगर यह भी विफल हो गई।

india us tariff tensions 2025: टैरिफ युद्ध में भारत की जीत पक्की, झुके ट्रंप

भारत और रूस की सक्रिय भूमिका

इस्तांबुल में हो रही शांति वार्ता की विफलता के बाद भारत और रूस ने अफगानिस्तान के साथ मिलकर पाकिस्तान पर दबाव डालने का फैसला किया है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन को रूस ने अपना समर्थन दिया है और उसने क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात की है। रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि अफगानिस्तान को क्षेत्रीय आर्थिक ढांचे में फिर से शामिल करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, भारत ने अफगानिस्तान के कृषि मंत्री से मुलाकात करके काबुल की मदद करने की बात की है, जिससे पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार हो रहा है।

Nobel Peace Prize 2025: इस वजह से ट्रंप को नहीं Maria Corina Machado को मिला सम्मान

वार्ता के विफल होने का एक ये भी (2025 Afg Pak conflict)

पाकिस्तान की ओर से इस वार्ता के विफल होने का एक और कारण बताया जा रहा है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का कहना है कि तालिबान सीमा पर आतंकवाद को रोकने के लिए कोई ठोस आश्वासन देने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान आतंकवाद से निपटने के लिए गंभीर नहीं है और इस वजह से पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर कड़े कदम उठाने होंगे।

संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए पर बात नहीं बनी

वहीं पाक की ओर से की जा रही ये बयानबाजी तालिबान के प्रति बढ़ती नाराजगी को दर्शाती है जो पाकिस्तान के लिए सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन चुका है। हालांकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे मगर सीमाओं पर जारी हिंसा के कारण यह समझौता पूरी तरह से लागू नहीं हो सका। इन लगातार हमलों ने दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीदों को तोड़ दिया है।

चारों तरफ से घेरने की साजिश, भारत के खिलाफ पाकिस्तान नया गेमप्लान

रूस और भारत का बढ़ता प्रभाव

रूस और भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत किया है, जिससे पाकिस्तान की चिंताएं और बढ़ गई हैं। रूस ने अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और तालिबान शासन को अपनी मदद की पेशकश की है। वहीं, भारत ने भी अफगानिस्तान के कृषि और अनुसंधान क्षेत्र में सहायता देने का वादा किया है, जिससे यह साफ होता है कि भारत और रूस मिलकर पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर मजबूत कदम उठा रहे हैं।

कपड़ा से हैंडीक्राफ़्ट तक, जानें ट्रंप टैरिफ से कैसे प्रभावित होंगे भारतीय उद्योग

बता दें कि इस्तांबुल की वार्ता के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान (2025 Afg Pak conflict) के बीच कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला, जिससे भविष्य में शांति वार्ता की संभावनाओं पर सवाल उठ रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच सहमति न बन पाने के कारण किसी भी दीर्घकालिक समाधान की संभावना बहुत कम नजर आती है। मध्यस्थ भी इस स्थिति से निराश हो चुके हैं और वर्तमान में कोई नई पहल करने के बारे में संकोच कर रहे हैं।

One thought on “समझौते के बावजूद सीमा पर खून-खराबा, तालिबान-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम क्यों टूटा; जानें अंदर की बात

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *