ईरान का सबसे खतरनाक हथियार, हवा में टारगेट बदलने वाली इस मिसाइल तकनीक ने उड़ा दी अमेरिका और इजरायल की नींद
ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक में एक ऐसा खौफनाक और आधुनिक बदलाव किया है, जिसने पश्चिमी देशों के सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को भी लाचार कर दिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहब्बी के एक हालिया बयान ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।
उनका दावा है कि ईरान की नई मिसाइलें न सिर्फ दुश्मन के रडार को चकमा दे सकती हैं, बल्कि लॉन्च होने के बाद हवा में ही अपना रास्ता और टारगेट भी बदल सकती हैं। इस स्वदेशी तकनीक ने अमेरिका और इजरायल की सुरक्षा रणनीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हवा में दिशा और टारगेट बदलने का करिश्मा
आमतौर पर बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च होने के बाद एक तय रास्ते पर चलती हैं, जिससे आयरन डोम, थाड (THAAD) या एरो-3 जैसे डिफेंस सिस्टम उनके रास्ते का अंदाजा लगाकर उन्हें हवा में ही नष्ट कर देते हैं। लेकिन ईरान का दावा है कि उसकी नई पीढ़ी की मिसाइलें ‘मल्टी-मैन्यूवरेबल’ (Multi-Maneuverable) हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर मिसाइल किसी एक शहर या बेस के लिए दागी गई है और दुश्मन उसे रोकने की कोशिश करता है, तो मिसाइल हवा में ही ‘डेटा लिंक’ के जरिए पलक झपकते अपना टारगेट बदल लेगी और किसी दूसरे असुरक्षित ठिकाने को तबाह कर देगी। यह तकनीक अब तक केवल चुनिंदा सुपरपावर देशों के पास ही मानी जाती थी।
फत्ताह से लेकर खुर्रमशहर तक: मौत का दूसरा नाम
ईरान के जखीरे में कई ऐसी मिसाइलें हैं जो इस करामात में माहिर हैं। सबसे ऊपर नाम आता है ‘फत्ताह-1’ और ‘फत्ताह-2’ का। यह ईरान की स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जिनकी रफ्तार मैक 13 से मैक 15 तक है। इनमें लगे ‘थ्रस्ट वेक्टरिंग नोजल’ इन्हें हवा में किसी भी दिशा में मुड़ने की ताकत देते हैं।
इसके बाद ‘खैबर शिकन’ का नाम आता है, जो MARV (मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस है और दुश्मन के डिफेंस जोन में घुसते ही तेजी से मुड़ सकती है। इसके अलावा इमाद और ‘खुर्रमशहर-4’ जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें भी हवा में नया रास्ता तय करने में सक्षम हैं। ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ के दौरान ईरान ने इजरायल पर इन्ही मिसाइलों से सटीक हमले कर यह साबित कर दिया था कि अब इजरायली और अमेरिकी रक्षा प्रणालियां अजेय नहीं रही हैं।
‘राद 500’: दुश्मनों पर बिजली बनकर गिरेगी हाइब्रिड मिसाइल
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद के बीच ईरान ने एक अनोखी हाइब्रिड मिसाइल ‘राद-500’ (Raad 500) तैयार की है। फारसी और अरबी में ‘राद’ का मतलब ‘बादल की गरज’ होता है। यह मिसाइल हज कासिम, खैबर शिकन और फतेह-110 मिसाइलों का एक खतरनाक कॉम्बिनेशन है।
ईरानी डिफेंस इंजीनियर्स ने हज कासिम बूस्टर में खैबर शिकन का वॉरहेड फिट करने की बड़ी चुनौती को पार कर लिया है। इन दोनों में 11 से 12 सेंटीमीटर का अंतर था, जिससे मिसाइल का ग्रेविटी सेंटर और हवा में बैलेंस बिगड़ सकता था, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस मुश्किल को सुलझा कर एक अभूतपूर्व ‘क्रॉस फैमिली’ मिसाइल बना दी है।
शून्य से शिखर तक: जब ईरान के पास नहीं थी एक भी मिसाइल
आज अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों की हवा निकल गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान की मिसाइल यूनिटें तबाह कर दी हैं। आज ईरान कुछ ही दिनों में नए हथियार बनाने में सक्षम है।
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डिफेंस एक्सपर्ट्स याद दिलाते हैं कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद जब इराक ने ईरान पर हमला किया था, तब ईरान के पास एक भी मिसाइल नहीं थी। उस समय अमेरिका, रूस और पूरा मिडिल ईस्ट इराक के सद्दाम हुसैन के साथ खड़ा था। ईरान ने दुनिया भर से मिसाइल मांगी लेकिन किसी ने मदद नहीं की। बिना मिसाइल के 8 साल तक युद्ध लड़ने वाले ईरान ने आज कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपनी जिद और मेहनत से मिसाइल प्रोग्राम को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां फारस की खाड़ी से लेकर लाल सागर तक अमेरिकी जहाजों पर उसकी मिसाइलों का खौफ मंडराता रहता है।

